फैक्ट चेक: Jio की 5G टेस्टिंग के कारण पक्षियों और लोगों के मरने का दावा, जानिए सच्चाई – The Focus Hindi

फैक्ट चेक: Jio की 5G टेस्टिंग के कारण पक्षियों और लोगों के मरने का दावा, जानिए सच्चाई

बर्ड फ्लू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. इस बीच सोशल मीडिया पर रिलायंस Jio को लेकर कई तरह के फेक न्यूज़ फैलाए जा रहे हैं. कई यूजर्स ने दावा किया है कि JIO की 5G की टेस्टिंग की वजह से पक्षियों की मौ’त हो रही है. यूजर्स का कहना है कि लोगों को मूर्ख बनाया जा रहा है कि बर्ड फ्लू फैल रहा है.

@RachnaSinghSP नाम के यूजर ने ट्विटर पर लिखा, ”खबर फैल रही है कि Jio के 5G टेस्टिंग से पक्षी म’र रहे हैं और बर्ड फ्लू का नाम दिया जा रहा है.” इसी टेक्सट को @Chunni_lal_sahu ने ट्वीट किया है.

इनके इस ट्वीट को बुधवार की शाम तक डेढ़ हजार से अधिक लोगों ने रिट्वीट किया है और करीब 9 हजार लोगों ने लाइक किया है.
क्या है हकीकत?

भारत सरकार ने अभी तक 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं की है तो ऐसे में 5G टेस्टिंग का सवाल ही नहीं उठता है. ”खबर फैल रही है कि Jio के 5G टेस्टिंग से पक्षी मर रहे हैं और बर्ड फ्लू का नाम दिया जा रहा है” इस तरह के दावे पूरी तरह झूठ हैं. इस तरह की अफवाहों को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि दिल्ली समेत 10 राज्यों में बर्ड फ्लू फैल चुका है और सैकड़ों की संख्या में पक्षियों की मौ’त हो रही है.

देश के 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एवियन इंफ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) के मामले आए हैं. सोमवार तक दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और गुजरात में बर्ड फ्लू की पुष्टि हो चुकी हैं.

एक तरफ जहाँ देश बुरी तरह कोरोना वायरस की दूसरी लहर की चपेट में है, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के कई भ्रा’म’क दावे किए जा रहे हैं। कई दावे ऐसे होते हैं कि उन पर लोग भरोसा कर लेते हैं और भ्रम की स्थिति पाले रखते थे। इस क्रम में एक दावा किया जा रहा है कि राज्यों में 5जी नेटवर्क की टेस्टिंग की जा रही है जिस कारण लोगों की मृ’त्यु हो रही है व इसे कोविड 19 का नाम दिया जा रहा है।

PIB फैक्ट चैक ने इस दावे को फ’र्जी करार दिया है। पीआईबी ने लिखा है, ‘एक ऑडियो मैसेज में दावा किया जा रहा है कि राज्यों में 5g नेटवर्क की टेस्टिंग की जा रही है जिस कारण लोगों की मृ’त्यु हो रही है व इसे कोविड 19 का नाम दिया जा रहा है। #PIBFactCheck: यह दावा फर्जी है। कृपया ऐसे फ’र्जी संदेश साझा कर के भ्रम न फैलाएं।

दरअसल, इस संबंध में एक ऑडियो मैसेज वायरल हो रहा है, जिसके माध्यम से ये फ’र्जी दावा किया जा रहा है।

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